Sunday, July 31, 2022

चांदी जैसा रग है तेरा सोने जैसे बाल

 

चांदी जैसा रग है तेरा सोने जैसे बाल

एक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल

जिस रस्ते से तू गुजरे वो फूलों से भर जाये-2

तेरे पैर की कोमल आहट सोते भाग जगाये

जो पत्थर तो छू ले गोरी वो हीरा बन जाये

तू जिसको मिल जाये वो-2, हो जाये मालामाल

एक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल

जो बेरंग हैं उसपे क्या क्या रंग जमाते लोग-२  

तू नादान न जाने कैसे रूप चुराते लोग

नज़रें भर भर देखें तुझको आते जाते लोग

छैल छबीली रानी थोड़ा छैल छबीली रानी थोड़ा

घूघट और निकाल

इक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल

घनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरा रूप-२  

गज़लें हों या गीत हों मेरे सब में तेरा रूप

यूँ ही चमकती रहे हमेशा तेरे हुस्न की धूप

तुझे नज़र ना लगे किसी की -२

जिये हज़ारों साल

इक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल

 

Tuesday, March 23, 2021

प्यार का पहला खत लिखने में

प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है
नये परिंदो को उड़ने में वक़्त तो लगता है
जिस्म की बात नही थी उनके दिल तक जाना था-2
लंबी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है-2
प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है
गांठ अगर लग जाये तो फिर, रिश्ते हो या डोरी-2
लाख करे कोशिश खुलने में, वक़्त तो लगता है-2
प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है
हमने इलाजे जख्म ए दिल तो ढूंढ लिया लेकिन-2
गहरे जख्मो को भरने में, वक़्त तो लगता है-2
प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है
नये परिंदो को उड़ने में वक़्त तो लगता है

Friday, November 20, 2020

है जिन्दगी कितनी खुबसूरत

 है जिन्दगी कितनी खुबसूरत-२ अभी उन्हें ये पता नहीं है-२

(जिन्हें अभी ये पता नही है )

कोई बहुत प्यार करने वाला-२ जिन्हें अभी तक मिला नहीं है

है जिन्दगी...............................................................

हमे तो मतलब है सिर्फ तुमसे-२ हमारे दिल में बस तू ही तू है-२

तुमसे मुहबत तुमसे शिकायत-२, और किसी से गिला नहीं है

है जिन्दगी कितनी खुबसूरत, अभी उन्हें ये पता नहीं है-२

मेरी निगाहों से दूर मत जा-२ सुकूने दिल बनके दिल में आ जा-२

ये कह रही है हर एक धड़कन-२, तेरे बिना कुछ मज़ा नही है

है जिन्दगी कितनी खुबसूरत, अभी उन्हें ये पता नहीं है-२

कोई बहुत प्यार करने वाला-२ जिन्हें अभी तक मिला नहीं है

है जिन्दगी...............................................................

 

चले जो आंधी वो तिनका तिनका-२ बिखर जाये आशियाँ गम नहीं है-२

जो तोड़ दे मेरे होशलों को-२, अभी वो तूफां उठा नहीं है

है जिन्दगी कितनी खुबसूरत, जिन्हें अभी ये पता नही है

कोई बहुत प्यार करने वाला-२ जिन्हें अभी तक मिला नहीं है

है जिन्दगी...............................................................

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Monday, September 7, 2020

हम तो हैं परदेश मे audio के लिये

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2

अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

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जिन आंखो मे काजल बनकर, तैरी काली रात (हो)-2
उन आंखो मे,आंसू का इक-2, कतरा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

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रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर हो
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर
आंगन वाले,नीम मे जाकर-2,अटका होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2
अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

Friday, August 28, 2020

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद

जिन आंखो मे काजल बनकर, तैरी काली रात (हो)-2
उन आंखो मे,आंसू का इक, कतरा होगा चांद हो
हम तो............

रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर (हो)-2
आंगन वाले,नीम मे जाकर,अटका होगा चांद हो
हम तो............

चांद बिना हर दिन यूं बीता,जैसे युग बीते हों -2
मेरे बिना किस, हाल मे होगा,कैसा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद 

Friday, November 23, 2018

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे
शलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें

ये दौलत भी ले लो

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

मुहल्ले की सबसे निशानी पुरानी
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वो नानी की बातों में परियों का डेरा
वो चेहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेरा
भुलाए नहीं भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी

कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया की शादी में लड़ना झगड़ना
वो झूलों से गिरना वो गिर के सम्भलना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफ़े
वो टूटी हुई चूड़ियों की निशानी

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना बनाके मिटाना
वो मासूम चहत की तस्वीर अपनी
वो ख़्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी
न दुनिया का ग़म था न रिश्तों के बंधन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी