Sunday, February 25, 2024

किसी से उनकी मंजिल का पता पाया नहीं जाता




कुर्बान में उनकी बक्शीश के मकसद भी जुबां पे लाया नहीं
बिन मांगे दिया और इतना दिया दामन में हमारे समाया नहीं
जितना दिया सरकार ने मुझको उतनी मेरी औकात नहीं
यह तो कर्म है उनका वरना मुझ में तो ऐसी कोई बात नहीं

किसी से, उनकी मंजिल का, पता, पाया नहीं जाता
जहां है वो फरिश्तों का वहां साया नहीं जाता
किसी से उनकी मंजिल का

मोहब्बत के लिए, कुछ, खास दिल, मकसूस होते हैं
मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस होते हैं
ये वो नगमा है जो
ये वो नगमा, है जो, हर साज पर, गाया नहीं जाता
ये वो नगमा है जो हर इक साज पर गाया नहीं जाता
किसी से उनकी मंजिल का पता
 
फकीरी में भी, मुझको मांगने में, शर्म आती है
फकीरी में भी मुझको, मांगने में शर्म आती है
तेरा बनके, किसी से, मांगने, जाया नहीं जाता
तेरा बनके, किसी से haथ फैला,या) नहीं जाता
किसी से उनकी मंजिल का

मेरे टूटे हुए, पैरों  तलब का, मुझ पे ऐसा है
मेरे टूटे हुए, पैरों तलब का, मुझ पे ऐसा है
तेरे दर से, उठके, ab कहीं,जाया नहीं जाता
किसी से उनकी मंजिल का

मोहबत, की नहीं जाती, मोहबत, हो ही जाती है
मोहबत की नहीं जाती, मोहबत हो ही जाती है
ये शोला, खुद भड़कता है, इसे, भड़काया नहीं जाता
 


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