वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
लौटता था मैं जब पाठशाला से घर
अपने हाथों से खाना खिलाती थी माँ
रात में अपनी ममता के आँचल तले
थपकीयाँ देके मुझको सुलाती थी माँ
सोच के दिल में एक टीस उठती रही
रात भर दर्द मुझको जगाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
सबकी आँखों में आँसू छलक आए थे
जब रवाना हुआ था शहर के लिए
कुछ ने माँगी दुआएँ की मैं खुश रहूं
कुछ ने मंदिर में जाकर जलाए दिए
एक दिन मैं बनूंगा बड़ा आदमी
ये तसव्वुर उन्हें गुदगुदाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
माँ ये लिखती है हर बार खत में मुझे
लौट आ मेरे बेटे तुझे है क़सम
तू गया जबसे परदेस बेचैन हूँ
नींद आती नहीं भूख लगती है कम
कितना चाहा ना रोऊँ मगर क्या करूँ
खत मेरी माँ का मुझको रुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
SONG LINK:
https://www.youtube.com/watch?v=177AB3XnYUU
KARAOKE LINK:
https://youtu.be/V-zG9pOPGjM
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
लौटता था मैं जब पाठशाला से घर
अपने हाथों से खाना खिलाती थी माँ
रात में अपनी ममता के आँचल तले
थपकीयाँ देके मुझको सुलाती थी माँ
सोच के दिल में एक टीस उठती रही
रात भर दर्द मुझको जगाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
सबकी आँखों में आँसू छलक आए थे
जब रवाना हुआ था शहर के लिए
कुछ ने माँगी दुआएँ की मैं खुश रहूं
कुछ ने मंदिर में जाकर जलाए दिए
एक दिन मैं बनूंगा बड़ा आदमी
ये तसव्वुर उन्हें गुदगुदाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
माँ ये लिखती है हर बार खत में मुझे
लौट आ मेरे बेटे तुझे है क़सम
तू गया जबसे परदेस बेचैन हूँ
नींद आती नहीं भूख लगती है कम
कितना चाहा ना रोऊँ मगर क्या करूँ
खत मेरी माँ का मुझको रुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
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https://www.youtube.com/watch?v=177AB3XnYUU
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https://youtu.be/V-zG9pOPGjM
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