Wednesday, September 20, 2023

रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये

रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
पहले जां फिर जाने जां फिर जाने जाना हो गये
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
 
दिन ब दिन बढती गई उस हुस्न की रा नाईयां
दिन ब दिन बढती गई उस हुस्न की रा नाईयां
पहले गुल फिर गुलबदन फिर गुलबदाना हो गये
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
 
आप तो नजदीक से नजदीक तर आते गये
आप तो नजदीक से नजदीक तर आते गये
पहले दिल फिर दिलरुबा फिर दिल के मेहमां हो गये
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
 
प्यार जब हद से बढ़ा सारे तकल्लुफ मिट गये
प्यार जब हद से बढ़ा सारे तकल्लुफ मिट गये
आप से फिर तुम हुए फिर तू का उनवाँ हो गये   
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
पहले जां फिर जाने जां फिर जाने जाना हो गये
रफ्ता रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गये
हस्ती का सामां हो गये
हस्ती का सामां हो गये
 



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Thursday, April 13, 2023

वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा चार पैसे कमाने मैं आया शहर गाँव मेरा मुझे याद आता रहा

वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
लौटता था मैं जब पाठशाला से घर
अपने हाथों से खाना खिलाती थी माँ
रात में अपनी ममता के आँचल तले
थपकीयाँ देके मुझको सुलाती थी माँ
सोच के दिल में एक टीस उठती रही
रात भर दर्द मुझको जगाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
सबकी आँखों में आँसू छलक आए थे
जब रवाना हुआ था शहर के लिए
कुछ ने माँगी दुआएँ की मैं खुश रहूं
कुछ ने मंदिर में जाकर जलाए दिए
एक दिन मैं बनूंगा बड़ा आदमी
ये तसव्वुर उन्हें गुदगुदाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
माँ ये लिखती है हर बार खत में मुझे
लौट आ मेरे बेटे तुझे है क़सम
तू गया जबसे परदेस बेचैन हूँ
नींद आती नहीं भूख लगती है कम
कितना चाहा ना रोऊँ मगर क्या करूँ
खत मेरी माँ का मुझको रुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा
चार पैसे कमाने मैं आया शहर
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा
 
 
SONG LINK:
https://www.youtube.com/watch?v=177AB3XnYUU
 

 
KARAOKE LINK:
https://youtu.be/V-zG9pOPGjM
 

Friday, February 24, 2023

खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है

खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  
अभी तकल्लुफ है गुफ्तगू में अभी मोहब्बत नई नई है  
खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  

अभी न आएगी नींद तुमको अभी न हमको सुकूं मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज्यादा अभी ये चाहत नई नई है  
खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  

बहार का आज पहला दिन है चलो चमन में टहल के आएं
फजां में खुशबू नयी नयी है गुलों पे रंगत रंगत नई नई है  
खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नरम अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है  
खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  


जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा कि आके बैठे हो पहली सफ में
अभी से उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है  
खामोशलब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  

बमों की बरसात हो रही है पुराने जांबाज़ सो रहे हैं
गुलाम दुनिया को कर रहा वो जिसकी ताकत नई नई है  
खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है  


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