Friday, July 8, 2016

तुमको देखा तो ये ख़याल आया

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

आज फिर दिल ने इक तमन्ना की
आज फिर दिल को हमने समझाया
ज़िंदगी धूप तुम...

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया हमने क्या पाया
ज़िंदगी धूप तुम...

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया
ज़िंदगी धूप तुम...


तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो

आँखों में नमी, हँसी लबों पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो
क्या गम है जिसको...

बन जायेंगे ज़हर पीते पीते
ये अश्क जो पिए जा रहे हो
क्या गम है जिसको...

जिन ज़ख्मों को वक़्त भर चला है
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो
क्या गम है जिसको...

रेखाओं का खेल है मुक़द्दर
रेखाओं से मात खा रहे हो
क्या गम है जिसको...

होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो

होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो
बन जाओ मीत मेरे, मेरी प्रीत अमर कर दो

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन
जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन
नयी रीत चलाकर तुम, ये रीत अमर कर दो
होंठों से छू लो तुम...

आकाश का सूनापन, मेरे तनहा मन में
पायल छनकाती तुम, आ जाओ जीवन में
सांसें देकर अपनी, संगीत अमर कर दो
होंठों से छू लो तुम...

जग ने छीना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारा
सब जीता किये मुझसे, मैं हरदम ही हारा
तुम हार के दिल अपना, मेरी जीत अमर कर दो
होंठों से छू लो तुम...

होशवालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है

होशवालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है
इश्क कीजिये फिर समझिये, ज़िन्दगी क्या चीज़ है

उनसे नज़रें क्या मिलीं, रौशन फिज़ाएँ हो गयीं
आज जाना प्यार की, जादूगरी क्या चीज़ है
इश्क कीजिये फिर...

बिखरी जुल्फों ने सिखाई, मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया, मैकशी क्या चीज़ है
इश्क कीजिये फिर...

हम लबों से कह ना पाए, उनसे हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं, ये ख़ामोशी क्या चीज़ है
इश्क कीजिये फिर..

चिट्ठी ना कोई सन्देश, जाने वो कौन सा देश

चिट्ठी ना कोई सन्देश, जाने वो कौन सा देश
जहाँ तुम चले गए, इस दिल पे लगा के ठेस
जाने वो...

एक आह भरी होगी, हमने ना सुनी होगी
जाते जाते तुमने, आवाज़ तो दी होगी
हर वक़्त यही है गम, उस वक़्त कहाँ थे हम
कहाँ तुम चले गए

हर चीज़ पे अश्कों से, लिखा है तुम्हारा नाम
ये रस्ते घर गलियाँ, तुम्हें कर ना सके सलाम
हाय दिल में रह गई बात, जल्दी से छुड़ा कर हाथ
कहाँ तुम चले गए

अब यादों के कांटे, इस दिल में चुभते हैं
ना दर्द ठहरता है, ना आंसू रुकते हैं
तुम्हें ढूंढ रहा है प्यार, हम कैसे करें इकरार
के हाँ तुम चले गए

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिकी का वो ज़माना याद है

तुझ से मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दांतों में वो उंगली दबाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

चोरी-चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुजरीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

खैंच लेना वो मेरा परदे का कोना दफ्फातन
और दुपट्टे से तेरा वो मुंह छुपाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

तुझ को जब तनहा कभी पाना तो अज राह-ऐ-लिहाज़
हाल-ऐ-दिल बातों ही बातों में जताना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

गया गर वस्ल की शब् भी कहीं ज़िक्र-ए-फिराक
वो तेरा रो-रो के भी मुझको रुलाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

दोपहर की धुप में मेरे बुलाने के लिए
वो तेरा कोठे पे नंगे पांव आना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

गैर की नज़रों से बचकर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा चोरी छिपे रातों को आना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

बा हजारां इस्तिराब-ओ-सद-हजारां इश्तियाक
तुझसे वो पहले पहल दिल का लगाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

बेरुखी के साथ सुनना दर्द-ऐ-दिल की दास्तां
वो कलाई में तेरा कंगन घुमाना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

वक्त-ए-रुखसत अलविदा का लफ्ज़ कहने के लिए
वो तेरे सूखे लबों का थर-थराना याद है
चुपके चुपके रात दिन...

बावजूद-ए-इद्दा-ए-इत्तक़ा 'हसरत' मुझे
आज तक अहद-ए-हवास का ये फ़साना याद है