Monday, September 7, 2020

हम तो हैं परदेश मे audio के लिये

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2

अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

1 53
जिन आंखो मे काजल बनकर, तैरी काली रात (हो)-2
उन आंखो मे,आंसू का इक-2, कतरा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

3 12
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर हो
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर
आंगन वाले,नीम मे जाकर-2,अटका होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2
अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेश मे

Friday, August 28, 2020

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो

हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद

जिन आंखो मे काजल बनकर, तैरी काली रात (हो)-2
उन आंखो मे,आंसू का इक, कतरा होगा चांद हो
हम तो............

रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर (हो)-2
आंगन वाले,नीम मे जाकर,अटका होगा चांद हो
हम तो............

चांद बिना हर दिन यूं बीता,जैसे युग बीते हों -2
मेरे बिना किस, हाल मे होगा,कैसा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद 

Friday, November 23, 2018

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे
शलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें

ये दौलत भी ले लो

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

मुहल्ले की सबसे निशानी पुरानी
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वो नानी की बातों में परियों का डेरा
वो चेहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेरा
भुलाए नहीं भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी

कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया की शादी में लड़ना झगड़ना
वो झूलों से गिरना वो गिर के सम्भलना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफ़े
वो टूटी हुई चूड़ियों की निशानी

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना बनाके मिटाना
वो मासूम चहत की तस्वीर अपनी
वो ख़्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी
न दुनिया का ग़म था न रिश्तों के बंधन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी

Tuesday, January 24, 2017

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है
जरा सा दिल है-2 इस दिल में मगर सारी खुदाई है
ये दिल अल्लाह का घर है ये दिल भगवान का घर है-2
कभी दिल में समां जाये तो दिल सैतान का घर है
इसी दिल में भलाई है इसी दिल में बुराई है-2
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है

यही दिल फूल है चट्टान है मोज़े समंदर है ( यही दिल है )-2
यही दिल नर्म पानी है यही दिल सख्त पत्थर है
छुपा है दरद बेदर्दी भी इसमें समाई है
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-2

जो चाहो देख लो इसमें ये आईने से सच्चा है (यही दिल है )-2
समझदारी में बुढा है तो भोलेपन में बच्चा है
खिलौना भी ये बन जाता है आदत ऐसी पाई है
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-2

बड़ी मुश्किल है इसका साथ छोड़ा भी नहीं जाये-2
अगर इक बार ये टूटे तो जोड़ा भी नहीं जाये
गुलो की आदते शीशे की फितरत जो पाई है-2
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है
जरा सा दिल है-2 इस दिल में मगर सारी खुदाई है

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-4

Monday, January 23, 2017

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आअवारगी ने मुझको, आवारा बना डाला

यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था, मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको, तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को ...

बड़ा दिल्कश बड़ा रँगीन है यह शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर की गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को ...


हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
मेरी मंजिल है, कहाँ मेरा ठिकाना है कहाँ
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं आंसू मैंने
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले
कंप-कंपाते हुए होठों की शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ऐ-खयालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
भूलना ही था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में