हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद-2अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांदजिन आंखो मे काजल बनकर, तैरी काली रात (हो)-2
उन आंखो मे,आंसू का इक, कतरा होगा चांद हो
हम तो............
रात ने एसा पेंच लगाया, टूटी हाथ से डोर (हो)-2
आंगन वाले,नीम मे जाकर,अटका होगा चांद हो
हम तो............
चांद बिना हर दिन यूं बीता,जैसे युग बीते हों -2
मेरे बिना किस, हाल मे होगा,कैसा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद
अपनी रात की छत पर कितना, तनहा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चांद