Tuesday, January 24, 2017

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है
जरा सा दिल है-2 इस दिल में मगर सारी खुदाई है
ये दिल अल्लाह का घर है ये दिल भगवान का घर है-2
कभी दिल में समां जाये तो दिल सैतान का घर है
इसी दिल में भलाई है इसी दिल में बुराई है-2
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है

यही दिल फूल है चट्टान है मोज़े समंदर है ( यही दिल है )-2
यही दिल नर्म पानी है यही दिल सख्त पत्थर है
छुपा है दरद बेदर्दी भी इसमें समाई है
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-2

जो चाहो देख लो इसमें ये आईने से सच्चा है (यही दिल है )-2
समझदारी में बुढा है तो भोलेपन में बच्चा है
खिलौना भी ये बन जाता है आदत ऐसी पाई है
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-2

बड़ी मुश्किल है इसका साथ छोड़ा भी नहीं जाये-2
अगर इक बार ये टूटे तो जोड़ा भी नहीं जाये
गुलो की आदते शीशे की फितरत जो पाई है-2
खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है
जरा सा दिल है-2 इस दिल में मगर सारी खुदाई है

खुदा ने दिल बनाकर क्या हदों की शै बनाई है-4

Monday, January 23, 2017

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आअवारगी ने मुझको, आवारा बना डाला

यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था, मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको, तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को ...

बड़ा दिल्कश बड़ा रँगीन है यह शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर की गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को ...


हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह
सिर्फ़ इक बार मुलाक़ात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
मेरी मंजिल है, कहाँ मेरा ठिकाना है कहाँ
सुबह तक तुझसे बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ
सोचने के लिए इक रात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
अपनी आंखों में छुपा रक्खे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों पे सजा रक्खे हैं आंसू मैंने
मेरी आंखों को भी बरसात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
आज की रात मेरा दर्द-ऐ-मोहब्बत सुन ले
कंप-कंपाते हुए होठों की शिकायत सुन ले
आज इज़हार-ऐ-खयालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में
भूलना ही था तो ये इकरार किया ही क्यूँ था
बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यूँ था
सिर्फ़ दो चार सवालात का मौका दे दे
हम तेरे शहर में


Sunday, January 8, 2017

हम तुम्हें ऐसी पिला देंगे तुम आओ तो सही

कौन है जिसने मय नहीं चक्खी
कौन झूठी क़सम उठाता है
मयकदे से जो बच निकलता है
तेरी आँखों में डूब जाता है

हम तुम्हें ऐसी पिला देंगे तुम आओ तो सही
होश का नाम भुला देंगे तुम आओ तो सही

जाम बोतल से भरो और लगा लो मुँह से
तुमको पीना भी सिखा देंगे तुम आओ तो सही

आज कल रोज़ है मयख़ाने में आना जाना
तुमको साक़ी से मिला देंगे तुम आओ तो सही

क्या कहा ग़म ने सता रखा है तोबा तोबा
ग़म को थोड़ी सी पिला देंगे तुम आओ तो सही